मेरे पंख

छाया की कलम से . . .

शब्दों से खेलना कवितायें लिखना मुझे बचपन से ही बहुत पसंद था पर ज्यादा लिखती नही थी या फिर शायद मुझे पता ही नही था कि लिखना मुझे इतना अच्छा लगता है यह मुझे आत्मसंतुष्टि देता है ! जब मैं लिखती हूँ उस वक़्त मैं शब्दों से बातें करती हूँ मन को पंख लग जाते है ! अब तो लगता है मेरी लेखन ही मेरा परिचय है और इसतरह ही मैं खुद से और लोगों से जुड़ पाती हूँ ! हाँ , मेरी कवितायें ही मेरा परिचय है ! एक कवयित्री के रुप में मैं अपने जीवन की जटिलताओं में भी सौंदर्य को देखती हूँ

सुबह वो सुकून है

जो अंधरे को मिटा कर आता है,

एक नई ताजगी के साथ आता है,

एक नई प्रेरणा के साथ आता है,

जीवन में कोई वेदना है तो उसे मिटा,

सुकून ले कर आता है हर सुबह.

-छाया

लिखते हुये मैं प्रकृति के सौंदर्य को निहार पाती हूँ ! सूर्य की गर्मी, चाँद की शीतलता, पुष्प का सौंदर्य, सावन की फुहार, सरिता का शांतचित्त, समन्दर का वेग, हवाओं की सरसराहट को महसूस कर पाती हूँ

प्रेम, मानव हृदय की कोमल भावनायें इन सब से मेरा परिचय मेरी कविताओं ने ही करवाया ! लेखन ने मेरे अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया