आसमां

एक गुमशुदा जहाँ देखते रहे,
अपने अंदर हम आसमाँ देखते रहे,
उस जहाँ में नींद तो थी पर मुक्कमल नही,
ख्वाब तो थे कुछ फटे-पुराने कपड़ों की तरह,
आसमां चाँद तारों की रौशनी से जगमग थे पर,
हृदय में तो कहीं बस अँधेरा ही अँधेरा था जो एक,
स्याह अँधेरी गुफा में लिये समाये जा रहा था . . .

छाया

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