चाँद की तरह

चाँद की तरह गुम हो जाते हो तुम भी,
बादलों की ओट में कभी पत्तों के झुरमुट में,
सारा दिन का इंतजार और तुम्हारी आँखमिचौली,
उफ्फ कैसे समझाऊं कि तुम्हें एक ना देख पाने से,
मन में कई सवाल उठते है जिसका जवाब होता ही नही . . .

छाया

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