फूलों जैसा है जीवन

मुझे फूल चाहिये थे हमेशा से,
कई बार पेड़ लगायी फूलों की,
पर कभी फूल आये नही काँटों ने,
फूलों को खिलने ही नही दिया कभी,
नीर डाल सींच देखा करती प्रतिदिन,
शायद खुशी के फूल खिले कभी जीवन की बगिया में . . . 

छाया

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