मेरे ख्वाब

बस मेरे आस –  पास ही है,
कुछ ख्वाब मेरे कानों के पास आ कर,
कुछ कहना चाहती है शायद वो पूछना चाह रही हो,
क्यों रोकती हूँ रौशनी को मैं इसकी हरएक किरण,
हमेशा से मेरे लिये ही तो है . . .

छाया

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