माँ

बस अभी-अभी तो कुछ महिने पहले फिर,
महसूस किया मैंने लाड़ – दुलार तुम्हारा माँ,
ममत्व तो बचपन से ही ढेर सारा दिया तुमने,
बस अभी-अभी कुछ महिने पहले मैंने महसूस किया फिर,

तुम ना होती तो किससे कहती पीड़ा अपनी मैं माँ,
तुम्हारी हर प्रार्थना में मैं थी हर दुआ बस मेरे लिये थी माँ,
बस अभी-अभी तो कुछ महिने पहले मैंने महसूस किया फिर,

मंदिर की चौखट पर तुम्हारे पांव बढे बस मेरे लिये माँ,
जब- जब आँसू आये तुमने गले लगाया माँ,
छोटी बच्ची सी हो तुमसे लिपटे रही हरपल मैं माँ,
बस अभी- अभी तो कुछ महिने पहले मैंने महसूस किया फिर . . .

छाया

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