अंधकार

बाहर भी अंधकार है मन के अंदर भी,
बाहर के अंधकार को तो मिटा सकते है,
मन के अंदर फैले अंधकार मिटा पाते है क्या,
नही . . वो तो हमारे पूरे तन में फैल रहा होता है,
जीतना होगा इस अंधकार से अन्यथा हमारा विनाश तय है . . .

छाया

%d bloggers like this: