कोहरे

हर गुलाब को कोहरे ने ,
सफेद आँचल से छुपा रखा है ,
बिना कहे खामोशी से परवाह ,
करता है वो बेपरवाह गुलाब की ,
कह रहा मैं हूँ ना ख्याल रखने के लिये . . .

छाया

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