दिल

दिल को सहेजा है कितना दुलार प्यार करती हूँ,
कभी दुखी ना हो ख्याल रखती हूँ खुद से ज्यादा,
रुठ ना जाये सोचती हूँ यही तो दोस्त है मेरा सबसे करीब,
चला जाता है मुझसे दूर कभी-कभी कितना मुश्किल होता है उसे ढ़ूंढ़ पाना,
कहती हूँ आओ मेरे पास बहुत सारी कहानियाँ है एक-एक कर सुनाऊंगी,
थोड़ी सी खुशियाँ है ढेरों दर्द है और सारे दर्द को खुशियों में बदलने की कोशिश है . . .

छाया

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