बातें शहद सी

तुम्हारी शहद सी बातें मुझे मीठी कर जाती है,
मुझमे घुली कड़वाहट को मिठास से भर देती है,
बातें बूँद-बूँद कर गिरती है हर जायका मन का हो जाता है,
डूब जाती हूँ मीठे समन्दर में बेखबर होकर बस सुनती जाती हूँ . . .

छाया

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