रात की तन्हाई

रात की तन्हाई ने एक बात कहीं,
चुपके से कानों में की सो जाओ,
चाँद भी तन्हा ही है हजारों तारो में,
फिर क्यों ये गिले शिकवे,
नही आयेगी कोई परी तुम्हें सुलाने,
न ही लोरी न कोई थपकी देगा ,
जीवन है यहाँ सब तन्हा ही है,
बस सब एक भ्रम में जी रहे . . .

छाया

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