हर बूँद

हर बूँद चाहती है नदी से मिलना,
विशाल सागर में खोना नही चाहती,
हर बूँद चाहती है सावन की फुहार बन बरसना,
प्रियतमा के नैनॊं में विरह के अश्रु नही बनना चाहती,
हर बूँद चाहती है पत्तों पर सुबह की औंस की बूँद बनना,
हर बूँद चाहती है एक सुंदर सा अस्तित्व हर बूँद चाहती है . . .

छाया

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