चाँद से पूछो

चाँद से पूछो,
नाराज़ हो जाता है,
बादलों में छुप सताता है,
निगाहें ढ़ूंढ़ती उसे नीले अम्बर में,
हठी की तरह आँखमिचौली खेलता रहता,
कभी तो सुध लेता उद्दिग्न मन से खोजती है निगाहें . . .

छाया

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