चुपचाप चाँद

चाँद भी आज चुप – चुप है,
शायद वो निशा से कुछ नाराज़ सा है,
निशा ने आने में देरी जो कर दी आज,
रातरानी फूल भी खिलने का इंतजार करता रहा,
निशा ने कहा रोशनी ने रोक रखा था वसंत जो आ गया . . .

छाया

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