तुम वो शायरी

जिसे लिखते वक़्त हम मुस्कुराते है,
नज़्म बन तुम मेरे अहसासों से बातें करते हो,
नही चाहती वापस आना वहाँ से जहाँ मेरे कलम,
लिखते वक़्त नाचते है नज्मों की लय पर झूमते है . . .

छाया

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