दिल शीशा मेरा

शीशे सा दिल मेरा,
जरा – जरा सी बातों से टूट जाता है,
पूछे हरवक़्त दिल क्यों तोड़ देते हो बोलो,
शीशे का हूँ टूट जाता हूँ पत्थर का हो जाऊँ क्या,
कठोर कोई आहत मुझे तोड़ नही पाये . . .

छाया

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