तुम्हारी सूरत

तुम्हारी सूरत,
दिखाई नही देती,
बस महसूस होती हैं,
जब-जब आँखें बंद होती हैं,
जीने की तमन्ना बढ़ जाती हैं,
उसवक़्त नींद के आगोश में रहना,
पसंद आता हैं . . .

छाया

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