ना चाहते हुए भी

ना चाहते हुए भी,
बिखर जाती हूँ मैं,
शाख से विलगे पुष्प की तरह,
टूट जाती हूँ मैं हर जगह से,
ना चाहते हुए भी,

हँस देती हूँ मैं बिना बात,
रो देती हूँ मैं कुछ सोच,
दर्द सीने में होता हैं हल्का सा,
ना चाहते हुए भी,

मन में उमस सी होती हैं,
कोई कसक सी होती हैं,
चाहती हूँ लम्बी साँस लेना,
ना चाहते हुए भी . . .

छाया

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