तुम तक कैसे आऊँ

तुम तक कैसे आऊँ,
अपनी सरहद तोड़ ना पाऊँ,
तितली बन जाऊँ रंगबिरंगी,
लाल हरे नीले पीले गुलाबी,
कहो ना तुम तक कैसे आऊं,

हवाओं से तुम्हारी बातें करते,
चिड़ियों से पूछते तुम्हारी खैर-खबर,
दिनकर की किरणों से तुम्हारा हाल जानते,
एक दिन एक पल तितली बन आऊंगी तेरे छत,
कहो ना तुम तक कैसे आऊँ अपनी सरहद तोड़ ना पाऊँ . . .

छाया

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