दिनों बाद

आज दिनों बाद याद आयी,
घुँघरू बाँध उसकी आवाज में,
ढूँढती तुम्हारे बातों की खनक,
मर्मभेदी होता है पल – पल,
अमला मन बार – बार द्रवित होता,
सोच की कभी तो कोई दिवस होगा,
पुलकित होंगी उस पल दिनों बाद . . .

छाया

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