यूँ चुपके से

एक आहट सुनाई दी,
किसी के पैरों की चाप,
धीमे से कानों में कौंधी,
मुखमंडल पर मुस्कुराहट,
नृत्य करती ओंठों तक आयी,
चूड़ियों ने इठलाना चाहा पर,
बिना शोर मौन हो गयी . . .

छाया

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