बोलती रातें

रातें बोलती है,
बातें करती है हमसे,
कहती है हम सब की कहानी,
कहती है डरो नही तुम अँधेरे से,
ये अपने काले रंग में सबकुछ समा लेती है,
प्रेम हो या नफरत . . .

छाया

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