मिलना मुझसे

मिलना मुझसे वहाँ,
जहाँ कोई बंदिशें न हो, 
मन पंछी की तरह उन्मुक्त हो,
हृदय पर रस्मों-रिवाजों के ताले ना लगे हो,
तुमसे मिलने के लिये अपने पाँव से कहना ना पड़े,
रुक जाओ अपनी रेखाओं को ना लांघो . . .

छाया

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