झुकी पलक

तुम्हारी झुकी पलकों को,
अपलक देखता रह जाता हूँ,
जब लाली बिंदी काजल लगा,
तुम मेरे पास से गुजर जाती हो,
तुम्हारे नि:स्वर नूपुर मेरे कानों को,
आनंदित करते है छम-छम स्वर मेरे,
हृदय के स्पंदन को तीव्र कर देते है,
जब तुम मेरे पास से गुजर जाती हो,
स्वप्न मंजरी वृष्टि से आनंदित हो जाती है . . .


छाया

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