” रात की बात “

वो रात मुझे यादों के एक खुबसूरत वादियों में ले जाता है जब मैं तुम्हारा इंतजार कर रही थी ! चाँद तारों से सजी रात . . . और तुम आये . . . थोड़ी देर के लिये ही सही . . . वो लम्हा बहुत खास था . . . मेरे ख्वाहिशों का लम्हा . . . एक लम्बी इंतजार के बाद उसके पूरे होने की खुशी ! दिल से माँगी कोई दुआ कुबूल हो जैसे . . .  वो बातें जो बरसों से अधूरी थी पूरी हो रही थी ! रेत घड़ी सा समय हाथ से फिसलता जा रहा था . . . इस छोटे से पल का खत्म होने का समय भी आ गया और तुम चले गये . . . और मैं तुम्हें जाते देखती रह गयी . . . डबडबाई आँखों से . . .

छाया

2 विचार “” रात की बात “&rdquo पर;

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