आखिरी चाय . . . लघुकथा

मुझे ठीक से तारीख तो याद नहीं पर मई का महीना था . . और . . तारीख पंद्रह से बीस के बीच की थी. .  शायद जब हमने लॉकडाउन से पहले एकसाथ चाय पी थी ! उसके बाद लॉकडाउन ही हो गया ! अभी हम लॉकडाउन के चौथे चरण में है और शहर में सबकुछ ठीक रहा तो हम फिर मिल पायेंगे चाय के साथ . . . मन में ऐसी उम्मीद है कि जल्द ही मैं उन खूबसुरत पलों को फिर से जी पाऊँगी . . . मन की भावनाओं को समेटना अब मुश्किल हो रहा . . सोचती हूँ कही ये ख्वाब टूट ना जाये . . . पर फिर भी आशा के साथ उन मीठे पलों का इंतजार कर रही . . . फिर से चाय के फ़ीकेपन में वही मिठास महसुस करूँगी . . .

छाया

2 विचार “आखिरी चाय . . . लघुकथा&rdquo पर;

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