रात की तन्हाई

रात की तन्हाई ने एक बात कहीं . . .
चुपके से कानों में की सो जाओ . . .
चाँद भी तन्हा ही है हजारों तारो में . . .
फिर क्यों ये गिले शिकवे . . .
नही आयेगी कोई परी तुम्हें सुलाने . . .
न ही लोरी न कोई थपकी देगा . . .
जीवन है यहाँ सब तन्हा ही है . . .
बस सब एक भ्रम में जी रहे . . .

छाया

2 विचार “रात की तन्हाई&rdquo पर;

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