हत्या . . . लघुकथा

यहाँ हत्या से ये अर्थ नहीं है कि किसी व्यक्ति को शारीरिक रुप से मार देना ! मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज में रहते वो बहुत तरह के उतार – चढ़ाव को झेलता है . . . इस तरह की मार से हमारा शरीर नहीं मन आहत होता है . . . और जब मन पूरी तरह से टूट जाता है तो उसे मन की हत्या ही कहा जायेगा ! वर्तमान समय में लोग एक विपदा से लड़ रहे है. . . इस लड़ाई में आर्थिक लड़ाई  भी लड़ रहे है . . . कुछ व्यवस्था की मार को झेल रहे है . . . इसी लड़ाई में . . धेर्य . . ही एकमात्र अौषधी है ! फिर भी  विपरीत परिस्थिति में मन टूट जाता है और व्यक्ति बिखर जाता है . . . एक तरह से इसे  मानसिक रुप से मार देना कहेंगे . . . ” हत्या ” ही माना जायेगा . . .

छाया

2 विचार “हत्या . . . लघुकथा&rdquo पर;

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