बिखरना

बिखरने के बाद भी,कुछ चीजें खुबसूरत लगती है,सूरज किरणें नही बिखेरता,तो इतना तेजस्वी नही होता,चन्दा अपनी चाँदनी बिखेर,अनुपम हो जाती है,प्रियतमा के बिखरे हुये केश,उसकी खुबसूरती दोगुना करते है,अतः जीवन में कभी तकलीफें आये,आप बिखर भी जाये तो उसमे भी, सुंदरता को देखे . . . – छाया

मुस्कुराता अँधेरा

बारिश की बूँदें अँधेरे में,मोतियों जैसे झिलमिलाती है,अँधेरा मुस्कुराता है उस रोशनी में,धीरे-धीरे टप टपक आवाज के साथ,कानों को एक ध्वनि सहलाती है प्यार से,अँधेरा मुस्कुराता है जब प्रियतमा पानी से,बचकर हौले-हौले चलती है पर पायल बोल उठते है. . . – छाया

बादल को भी इंतजार है . . .

इसतरह तो बात,नहीं हो पायेगी तुमसे,बस मैं बोलू और तुम चुप रहो,कभी तो खामोशी को तोड़ कर देखो,बादल को भी इंतजार है कि जब तुम,बोलोगे तभी बरसेंगे. . . – छाया

आज मैंने

आज मैंने यादों की झील में फेंका एक कंकर,वो भी डूब गयी झील के पानी के सन्नाटे में,फिर सोची तैरना ही सीख लूँ,कोशिश की तो झील ने कहा,तैरने से अच्छा है क्यों ना,डूब कर ही सुकून लिया जाये . . . – छाया

तेरे आ जाने से . . .

तेरे आ जाने से,कुछ ज्यादा बदला नही,सब वैसे ही है वहीं शाम,वही सवेरा बारिश की बूँदें,भी वैसी ही है बस एक चीज़,बदली वो है मेरे ख्वाब मेरे अहसास,जो अब मेरे साथ मुस्कुराते है. . .  – छाया

रात से संवाद . . .

रात तो मेरी बहुत अच्छी सहेली है ! सारे मन की बात करती हूँ मैं इससे . . खुशी . . गम . . तन्हाई. . और ये एक अच्छी सहेली की तरह मेरी हरबात सुनती है बड़े प्यार से . . आत्मीयता के साथ ! मैंहमेशा रात से जब बातें करती हूँ तब कहतीपढ़ना जारी रखें “रात से संवाद . . .”

बूँद – बूँद

बूँद-बूँद जीवन बरसे, मनवा काहे तू तरसे,हर बूँद में है एक आशा,हर बूँद में है एक अपनापन,मन का अवसाद धोती हर बूँद,बूँद-बूँद जीवन बरसाती हर बूँद . . . – छाया