परछाई

मैं तो परछाई हूँ, हमेशा साथ तुम्हारी छाया, हरपल रहती तुम्हारे साथ-साथ, तुम्हारी परछाई ने मेरे दिल में घर बनाया, सुंदर सा घर जब मन हो आ जाना मिलने . . . – छाया

मेरे ख्वाब

बस मेरे आस –  पास ही है, कुछ ख्वाब मेरे कानों के पास आ कर, कुछ कहना चाहती है शायद वो पूछना चाह रही हो, क्यों रोकती हूँ रौशनी को मैं इसकी हरएक किरण, हमेशा से मेरे लिये ही तो है . . . – छाया

बैंगनी फूल

खिले है बैंगनी रंगों के फूल, हर फूल बातें करती है सुनाती है, अनकही कहानी एक राजकुमारी कि, जिसे इन फूलों से कभी असीम प्रेम था . . . – छाया

चाँद की तरह

चाँद की तरह गुम हो जाते हो तुम भी, बादलों की ओट में कभी पत्तों के झुरमुट में, सारा दिन का इंतजार और तुम्हारी आँखमिचौली, उफ्फ कैसे समझाऊं कि तुम्हें एक ना देख पाने से, मन में कई सवाल उठते है जिसका जवाब होता ही नही . . . – छाया

खत

अहसासों का आईना, शब्दरूप में रखा गया हो, एक कहानी जिसे लिखते हुये, अश्रु नीर बन बहे होंगे मन तड़पा होगा, कई सवाल उठे होंगे जबाव का इंतजार होगा, एक बूँद अश्रु कागज पर गिरा होगा शायद वो भी, खत के साथ एक संदेश ले गया होगा लिफाफे में बन्द . . . – छाया

फूलों जैसा है जीवन

मुझे फूल चाहिये थे हमेशा से, कई बार पेड़ लगायी फूलों की, पर कभी फूल आये नही काँटों ने, फूलों को खिलने ही नही दिया कभी, नीर डाल सींच देखा करती प्रतिदिन, शायद खुशी के फूल खिले कभी जीवन की बगिया में . . .  – छाया

तारों की छाँव

तारों की छाँव में बैठी थी ,चुपचाप गुमसुम सी छत पर ,सोच रही बातें करती हूँ इनसे ,सब जाने – पहचाने अपने से लगते है ,रात के अँधेरे में मुझसे पूछते है क्या सोच रही ,कहते है मैं हूँ न जीवन में रौशनी के लिये फिर अंधरे से कैसा डर . . . – छाया

कोई ऐसा नही

कोई ऐसा नही कहूँ जिससे पीर अपनी, कोई ऐसा नही जिसे बताऊँ आँसू आये, कोई ऐसा नही जिसे बताऊँ क्यों आये, कोई ऐसा नही जिससे कहूँ हँसना है मुझे, कोई ऐसा नही जो दे सके उपहार उन्मुक्त हँसी का . . . – छाया

याद

एक – एक मोती, माला बनाकर दूँगी उपहार, रखना सीने से लगा हरपल, समय के धागों से पिरोया, हर एक यादों को संजोया है . . . – छाया

आसमां

एक गुमशुदा जहाँ देखते रहे, अपने अंदर हम आसमाँ देखते रहे, उस जहाँ में नींद तो थी पर मुक्कमल नही, ख्वाब तो थे कुछ फटे-पुराने कपड़ों की तरह, आसमां चाँद तारों की रौशनी से जगमग थे पर, हृदय में तो कहीं बस अँधेरा ही अँधेरा था जो एक, स्याह अँधेरी गुफा में लिये समाये जापढ़ना जारी रखें “आसमां”