बूँद – बूँद

बूँद-बूँद जीवन बरसे, मनवा काहे तू तरसे,हर बूँद में है एक आशा,हर बूँद में है एक अपनापन,मन का अवसाद धोती हर बूँद,बूँद-बूँद जीवन बरसाती हर बूँद . . . – छाया

कोशिशें

कितनी भी कोशिशें कर लूँ,दरवाजे बन्द कर लूँ खिड़कीया भी,धूप मेरे मन के आँगना में चली ही आती है,वैसे ही तुम्हारी याद बन्द दरवाजे को पार कर,मेरे मन के आँगना में धीरे से चुपके से चली आती है . . . – छाया

मेरी तरफ देख जिन्दगी

जिन्दगी मेरी तरफ़ भी देख,किस बात से खफा है तू,जिन्दगी एकबार मेरी तरफ भी देख,एक कप चाय की तलब सी है तू जिन्दगी,तू कहे तो अश्को को मिला चाय में,मैं भी पी जाऊँ जिन्दगी,मान मेरा कहना एक बार मेरी तरफ भी तो देख. . . – छाया

उम्मीद की एक बूंद

उम्मीद कि एक बूंद,प्रेरणा के लिये बहुत है,नये दिवस के लिये बहुत है,जीवन जीने के लिये बहुत है,लक्ष्य तक पहुँचने के लिये बहुत है,खिलखिला कर हँसने के लिये बहुत है,एक बूंद उम्मीद बहुत है . . . – छाया

एक शाम

एक शाम ऐसी भी होगी,जब आसमां को घन ने ढक रखा होगा,आषाढ़ के मेघ जो कभी भी बरसने को आतुर,गरज – गरज कर बरस रहे होंगे झम – झमाझम,एक छोटी चिड़ी जो छुपी बैठी है आम के पेड़ पर,पत्तों से छुपा रखा है खुद को पर बूँदों ने भिगोयें उसके परों को,छोटी चिड़ी कैसे जायेगीपढ़ना जारी रखें “एक शाम”

आखिरी ख्वाहिश

मेरी पहली और आखिरी ख्वाहिश,मैं हमेशा खुश रहूँ दिल से हँसा करूँ,आसमां तले बाँहें फैला बादलों को बुलाऊ,बारिश को बाँहों में भर प्यार करूँ दुलार करूँ,रात में तारें मुझसे बातें करे मेरी तन्हाई को बांटे,तितलियां फूलों से पराग ले मेरे जख्मों पर मरहम लगाये,मेरी आखिरी ख्वाहिश . . . – छाया