तस्वीर

तस्वीर खींची लम्हों को कैद कर, खुशी के लम्हों को कैद की यादों में, जब देखूं आँखों में चमक आ जाये, गम वाले लम्हों को भी कैद की यादों में, जब देखूं आँखों में अश्क आये पर वो, गलतियों का आईना हो . . . – छाया

विचलित मन

जब हम दूसरों की बातों को, हद से ज्यादा सुनते सोचते है, तब मन विचलित होता है, खुद की अहमियत भूल जाते है, हृदय कुंठाओं से ग्रसित होता है, तब मन विचलित होता है, अपने जीवन को दूसरों की नज़रों से देखे, निष्कर्ष निकाले तब मन विचलित होता है . . . – छाया

तुम्हारे होने का अहसास

तुम्हारे होने का अहसास, हर दिन उसके साथ जीना, उस अहसास को आँचल में समेटे, बैठी हूँ आस में कि एक दिन एक पल, कभी तो उसे मैं अपना कह पाऊंगी, मेरी खामोशियों को शब्द मिल पायेंगे, वो शब्द गीत बन मुझसे बातें करेंगे . . . – छाया